गुरुवार, 27 सितंबर 2007
खबरों की खबर
बिना पैसे के खबर पाने की जुगाड़ एक दिन इन खबरिया चैनेलों की हवा निकाल देगी । इन्टरनेट और अखबारों मे आये दिन citizen रिपोर्टर बनने के सपने परोसे जाते है । अगर कैमरा है तो ठीक वरना मोबाइल कैमरा काम कर जाता है । किसी के भी कहीँ के मारपीट या प्रेमी युगुल का फोटो खींचा और भेज दिया । viewer अलर्ट मे इनाम भी पा गए । झूठ के पुलिंदों से भरे ब्रेकिंग न्यूज़ । मुझे याद है कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के एक गांव मे एक गरीब बाप की बेटी की लाश की इन खबर्चिओं ने १३ लाख मे बोली लगवा दी । अक्सर नाग और नागिन की लडाई दिखाने वाले एक चैनल ने लाइव ओ वी खडी करवा दी । अगले दिन अपने अपको सबसे तेज चैनल कहाने वाले टी वी चेंनेल के पत्रकार भी दिल्ली से मैनपुरी मे आ धमके । visual कुछ थानही अलबत्ता २४ घंटे के बाद खबर की हवा निकल गयी । २ साल पुरानी लाश को कोई १ महिने पुरानी बता रह था कोई १ हफ्ते पुरानी । साप और साड वाले चैनल का रिपोर्टर इन्टर मे पढ़ रह है और १० १२ लड़को को साथ ले कर घूमता है । उसके मुताबिक कुछ ही दिनों मे वो एडिटर बनने वाला है साथियो को पत्रकार बना कर ही दम लेगा। उसे तो सनसनी मे मज़े लेने थे । पत्रकारिता की एथिक्स पर काम करने वाले हैदराबाद के चैनल के पत्रकार रोते रह गए । टी आर पी कोई और मार ले गया। देश के सबसे पुराने प्रायवेट न्यूज़ चैनल के पत्रकार को भी लाश पर फोनो देना ही पड़ा। बेचारा बार बार अपने सीनियर को बता रहा था की खबर फर्जी है एक no १ अख़बार ने खबर छाप दी थी। मगर शायद नौएडा वाले कुछ भी सुनने को तैयार नही थे। हकीकत जैसी खबर वैसी की ऐसी की तैसी । सब दिखा रहे है तुम भी भेजो ॥ अब लाश को पुलिस रखा रही है। और रतिराम को पुलिस के चक्कर लगाने पढ़ रहे हैं। साप वाले पत्रकार किसी चौराहे पेर खडे हो कर school जाने वाली लडकी के साथ हरकत करवा रहे है और मोबाइल पेर उसकी तस्वीर चैनल के लिए तैयार कर रहे है।
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